Verse 193-सिनेमाघर -Theatre

इन्सां बड़ा खिलाड़ी बनता खेल-खेल मगर ,
वाह-वाही की खातिर हर पल बनता है एक्टर।
थपकी अच्छी होती केवल वही जो हो स्वाभाविक ,
वारना उसका घर बन जाता बिलकुल सिनेमाघर ||