Verse 74-आदत-Habit

हर आदत मकड़ी का जाला इसकी सख्त जकड़,
निकल न पाता जो फंस जाता, इस जाले अंदर |
जिस्म झिंझोड़े, उछालो-कूदो मुक्ति नहीं है मिलती,
बड़ा ही जकडालू होता है मकड़ियों का घर ||

Verse 26 – शराब – Alcohol

मज़दूर के पैसे लेके जाता ठेके पर,
घर आकर फिर गर्जन करता यह कंजरी का घर |
प्रेत नशा, न दिखते उसको बच्चे भूखे-प्यासे,
घर घोंसला होता है जो समझे उसको घर ||