Verse 12 – प्रीत – Love

कुड़ी वह गांव बगूने की रूपवती चंचल,
उसके रूप अनूप पे जाके अटकी मेरी नज़र |
देख के उसको दिल खिल उठता रखूं उसको पास ,
जब तक जीवन तब तक होगी प्रीत हमारा घर

Verse 12 – प्रीत – Love

कुड़ी एक गावँ बगूने की रूपवती चंचल,
उसके रूप-अनूप पे जाकर अटकी मेरी नज़र |
देख के उसके दिल खिल उठता रखूँ उसको पास,
जब तक जीवन तब तक होगी प्रीत हमारा घर ||