Verse 26 – शराब – Alcohol

मज़दूर के पैसे लेके जाता ठेके पर,
घर आकर फिर गर्जन करता यह कंजरी का घर |
प्रेत नशा, न दिखते उसको बच्चे भूखे-प्यासे,
घर घोंसला होता है जो समझे उसको घर ||

Verse 2 – जीवन – Life

एक टुकड़ा मैं रोटी मांगू सोने से बस नुक्कड़ ,
इक पल मांगू मुस्काने को , इस धरती के ऊपर |
रोने का एक पहर मैं मांगू , लोटा एक शराब,
ओक से रह-रह पीड़ा चलके , यही है जीवन घर ||