Verse 222-एकाकी-Alone

बिन तेरे मैं साथी, भटकूं दुनिया में दर-दर ,
मेरा कोई हमदम न था तरसा जीवन भर |
चाहत-संशय-तर्क अनगिनत देह में रहे समाये ,
और नसों मैं हुए धमाके ढह गया मेरा घर |

Verse 54- पराया -Alienation

शिकार यार बनाया झेले ज़हरीले खंजर ,
दिल का मॉस खिलाया उसके टुकड़े टुकड़े कर|
पर उसने ये चुग्गा चुग कर ऐसी भरी उड़ान,
खेत पराये जाकर बैठा, बैठा दूजे घर ||

Verse 51- निरंक घर- Empty

घर हौंसला होता है बच्चे मांगे बहियन पर,
पंख मिले तो भरे उड़ाने बच्चे गिर फर-फर|
बैठे अकेले अम्मा रोती , रहता बाप उदास,
नीड बनाते बच्चे अपना, कर के सूना घर