Verse 228-तमक – Fury

जब रूठे तू और फेर ले अपनी तीर-नज़र ,
सौ-सौ बिजली तड़तड़ करती गिरती है दिल पर।
सीने में छाए बेचैनी जीवन मुझे चिढ़ाए ,
यूँ लगता है संशय में आंहें भरता यह घर ||

Verse 225- आतुर- Restless

कब से आतुर बैठा हूँ मै तुझसे नेह लगाकर,
और विलग न रह पाउँगा दशा हुई कातर |
मुझे बता प्रियतमा ऐसे प्रेम निभेगा कब तक ,
छोड़ विछोह , आ चलो बनाएँ रास्ता-बस्ता घर ||

Verse 201-खट्टा मीठा-Sour and Sweet

आस-निराश न समझे मेरा मनवा लाल-बुझक्कड़,
इस देती है मीठा चुम्बन दूजी जड़ती थप्पड़|
इक झगड़ालू लड़ती, दूजी आलिंगन में बांधे ,
दोनों के जब तार जुड़े तब संभला रहता घर ||

Verse 169-क्रोध-Anger

माथे की तू पोंछ ले तू भृकुटि, चेहरे जऐ संवर,
क्रुद्ध रूप यह देख तुम्हारा, सेहमा सारा घर।
नहीं भूलना सीखे यह मेरी ‘खींचे रखना डोर’,
प्यार और अनुशासन ही मिल कर सुखी बनाते घर ||

Verse 23- मंदिर – Devalya

एक दिन मई दुखियारा पहुंचा शिवजी के मंदिर ,
मगन खड़ा था शिव-अर्चन में साधु एक्कड़ |
मई बोलै विपता का मारा सीख दीजिये कुछ ,
बोलै वह, क्यों आये यहाँ पर तेरा मंदिर घर ||

Verse 16 – माँ – Mother

खीझ न मेरी अम्मा न तू ऐसे रूठा कर ,
बतलाता हूँ कहाँ रहा मई फिरता यूँ आखिर |
एक गौरेया घर थी बुनती उसको झाड़ा हैरान ,
रहा देखता देर लगी यूँ मुझे लौटते घर ||