Verse 233-यथार्थ- Reality

बीते समय के खेत में दिखता मुझको ये अक्सर,
घर बनाता बालक कोई ढेरी के ऊपर।
मैं बचपन को याद करूँ तो अंतर समझ में आए,
सपने वाला कैसा था और कैसा असली घर ||