Verse 220-पतझड़-Autumn

कल तक पत्ते हरे भरे थे आज लगी पतझर ,
कब तक हरित की प्रतीक्षा में रहोगे यूँ आतुर।
पतझर आई है तो हरे भी लौटेंगे, रे मन,
जीवन नाम गति का यूँ न बैठ बिसूरो घर ||