Verse 186-ईंट-Bricks

नक़्शे सोचो, रूप विचारो सुन्दर घर के, पर,
अपना नाम लिखा लो चाहे ईंट-ईंट ऊपर |
खूब सजाओ खूब संवारो इसका कोना-कोना,
लोग देख कर बरबस बोलें, कितना सुन्दर घर ||

Verse 126-सौंदर्य- Beauty

आँख हिरनिया भवें कमानी काजल है नश्तर,
तेज़ कटीले तीर नज़र के छोड़ मेरी खातिर |
होंठ तुम्हारे नारंगी से दांत मखाने से ,
तू आई तो स्वर्ग बना है भाग-भरा है यह घर ||