Verse 117-असत्यता – Falsity

आस बनाये पागल बोले चल तू मेरी डगर,
मानुष के मन भाएँ धोखे, सब कुछ लागे गुड़ |
धुल झाड़ के सोचे शायद कल होगा उज्जवल,
कल संभवतः बने भयंकर और उजाड़े घर ||