Verse 173-गौरेया -Bird

गौरेया सुन्दर नीड़ में दुःख भोगे बन्दर,
‘गज़नी ‘ से यह ध्वस्त हैं करते सारनाथ मंदिर |
तिनका-तिनका करते इसको काफिर-घर कहते ,
पुनः गौरेया उन तिनको से बुनती अपना घर ||

Verse 16 – माँ – Mother

खीझ न मेरी अम्मा न तू ऐसे रूठा कर ,
बतलाता हूँ कहाँ रहा मई फिरता यूँ आखिर |
एक गौरेया घर थी बुनती उसको झाड़ा हैरान ,
रहा देखता देर लगी यूँ मुझे लौटते घर ||

Verse 10 – कुंज – Bowerbird

मत कर निंदा कुंज की ये तो लम्बा करे सफर,
विशराम-स्थल की खोज में चाहे थक जाते है पर|
खास जगह ही बने घोंसला , ममता का बंधन ,
लम्बे सफर पे फिर उड़ जाना छोड़ के अपना घर

Verse 55- मन – Mind

यह मन पाखी उड़ता जाए , भले थके हो पर,
उड़ते-उड़ते तन का चाहे बन जाये पिंजर |
न ही उसका ठौर ठिकाना , न इसकी मंज़िल,
लम्बी दिव्य उड़ाने पे निकला , पर न कोई घर ||

Verse 10 – कुंज – Bowerbird

मत कर निंदा कुंज की यह तो लम्बा करे सफर,
विश्राम-स्थल की खोज में चाहे थक जाते हैं पर |
ख़ास जगह ही बुने घोंसले , ममता का बंधन ,
लम्बे सफर पे फिर उड़ जाना छोड़ के अपना घर ||