Verse 173-गौरेया -Bird

गौरेया सुन्दर नीड़ में दुःख भोगे बन्दर,
‘गज़नी ‘ से यह ध्वस्त हैं करते सारनाथ मंदिर |
तिनका-तिनका करते इसको काफिर-घर कहते ,
पुनः गौरेया उन तिनको से बुनती अपना घर ||

Verse 120 – सरल जीवन – Simple Life

चल रे मन आ सुनें कहीं जा चिड़ियों की फुर-फुर,
जन्म -मरण के झंझट भूलें कड़वे और बे-सुर |
मस्त हुलारे लेकर मनवा झूले झूला आज ,
इन्ही सुहानी खुशियों में संग रंग ले अपना घर ||