Verse 138 – न्यून – Small

मन छोटा परवाज़ भी छोटी , क्या छुए अम्बर ,
छोटे दर्द के छोटे मरुस्थल, तड़पन भी लघुतर |
अगर लड़ाई से डर लागे तो चाहे न लड़ ,
लड़ो तो ऐसे,महल बने या उजड़े अपना घर ||

Verse 37 – लीला – Sight

अगर देखनी चाहो लीला प्रेम की , बनो निडर,
डरते-डरते कदम न रखना प्रेम के इस मंदिर |
लाज प्रेम की रखनी है तू इसे लहू से सींच ,
प्यार खून से रंगे न जब तक बनता नहीं है डर ||

Verse 47 – योद्धा – Soldier

गंवई-देहाती जंग को जाते योद्धे यह निडर ,
देशभक्त, पर देश कौन-सा, कुछ ना होश-खबर |
जंग लगी है किस कारणवश इतना भी ना जाने,
पर यह जाने उन्हें बचाने लड़ कर अपने घर ||

Verse 48 – निर्भय दिल – Fearless Heart

हो अगर ना दिल मानव का निर्भय और निडर ,
तो मानवता खतरे में है मुझको लगता डर |
किस खातिर यह घर-चौबारे, लुटे जो अपनी लाज,
तोड़ो ऐसे महल-मीनारे , फूंको ऐसे घर ||