Verse 180-साहसी-Brave

जीना दूभर हो जाए जब बन जा तू निडर ,
हिम्मत टूट गई तो समझो रहे न खोज-ख़बर।
काम पे जाते बेटे को यह कहती निर्धन माँ,
लौट के तुम आ जाना बेटा अपनी माँ के घर ||

Verse 118 – वीरता – Bravery

भाव अभी न देहके पूरे मन न हो कातर,
तपन और भड़केगी पीड़ा डालेगी लंगर |
पीड़ा सही नहीं जाती तो कह दो मन की बात,
मैं भेजूँ अनमोल उमीदें किसी और के घर ||