Verse 11 – समानांतर – Parallel

जैसे झरने ढूंढे नदियां ,नदियां दूँढे सर,
जैसे हवा आसमानों में खोजे निज दिलबर |
कोई यहाँ नहीं एकाकी सभी हैं जोड़ीदार,
प्रीत में फिर क्यों मिल न पाते तेरे मेरे घर ||