Verse 59-दिलेर – Brave

क्यों बुनते हो , सोचो लोगो, संकोची बुन्तर ,
कौन सा डर है तुम्हे सताता हुई है क्या गड़बड़ |
मौत का इक दिन निश्चित है फिर क्यों मरते रोज़ ,
खौंफ निकालो मन से तो ही , निर्भय होगा घर ||