Verse 223- जाति पात- Casteism

एक रोज़ पूजा करने मैं पहुंचा राजा के मंदिर,
पंडित की बेटी से मेरी ऐसी लड़ी नज़र |
मैं ठाकुर का बेटा देखूं इस दुनिया की रीत ,
जातपात के झंझट से हैट ढूँढूं अपना घर |

Verse 104-धाकड़ – Fearless

ना मैं मियाँ, राजपूत ना, ना पंडित ना ठक्कर,
मेरी कोई जात नहीं, ना भोट ना मैं गुर्जर |
नाम है धाकड़,काम है धाकड़, मेरी राह भी धाकड़,
इस दो-मुंही दुनिया अंदर कोई न मेरा घर ||

Verse 140-विभेदन- Discrimination

चाहे मारे पीटें मुझको  मैं यह कहूँ मगर,
हर मज़हब, हर कौम ने, ज़ारी रखी है गड़बड़ |
करें विभाजन जातपात के छोटे-छोटे वृत्त,
दीवारें और बाड़ लगा कर बाटें सांझे घर ||