Verse 219-चूज़े -Chicks

चलो सुनें चूं- चूं चूसों की मुर्गों की कुड़- कुड़ ,
मन किया तो मोल से लेंगे चूज़ा या ‘कुक्कड़’ |
प्रीत भी दिल के टुकड़े कर के इसी तरह है खाती ,
दिल यह समझे प्रेम ही उसका सुखद सुहाना घर ||