Verse 214-गणित-Maths

समझ गणित न आए इसमें कितने हेर और फेर,
डैडी आप दिला दो मुझ को स्वयं एक कंप्यूटर।
टीचर खुद ही परेशान है देख के गणित नया ,
बोलें- जाओ नालायकों सीखो जा कर अपने घर ||

Verse 212-शालू- Shalu

शालू बीटा गोपी बनती तू लेकर गागर,
‘गिद्दा’ गाती, एक्टिंग करती, और बनती एक्टर।
मेहनत से पढ़- लिख कर तू भी सीख ले थोड़ी हिंदी ,
मानोगी जो ये सीख मेरी फिल्म बनाएंगे घर ||

Verse 211-रश्मि – Rashmi

रश्मि बेटे तू खाती है चीनी और शक्कर,
सुन तू मेरी, तुझे बताऊँ जीवन का इक गुर |
तेरी मीठी-नर्म तबीयत और तेरा यह हठ,
इन्हीं में अनुरूप रचोगी मन-मर्ज़ी का घर ||

Verse 210-पूनम- Poonam

पूनम बेटी बात सुनो तुम तनिक कान धार कर,
जान लो , कोई जान सका न किस्मत का चक्कर|
जो होना है, हो जायेगा, जाने कौन क्या होगा,
तेरे भाग में क्या बताऊँ लिखा है किसका घर ||

Verse 103- शेर-Lion

बहुत ही सुन्दर और बहादुर शेरों में बब्बर,
मगर शेरनी बच्चे पाले ठांव-ठांव जाकर |
शेर तनिक न बने सहायक काहे का वनराज,
निज-हितकारी गृह-स्वामी का घर निकम्मा घर ||

Verse 106-बेटियाँ -Daughters

वे योद्धा थे, ज़ालिम थे वे सब है मुझे खबर ,
ज़ुल्म किये मेरे पुरखों ने कैसे बेटियों पर |
वंशावली दिखाते अपनी होती मुझे ग्लानि ,
धिक वीरता, दफनाते नवजात बेटियां घर ||

Verse 16 – माँ – Mother

खीझ न मेरी अम्मा न तू ऐसे रूठा कर ,
बतलाता हूँ कहाँ रहा मई फिरता यूँ आखिर |
एक गौरेया घर थी बुनती उसको झाड़ा हैरान ,
रहा देखता देर लगी यूँ मुझे लौटते घर ||

Verse 80-कब्र- Grave

जीते-जी देकर संखिया गले में कसके सूत,
बेटी की हत्या  करते थे, मांगते थे सब पूत |
हत्याकांड यह राजपूतों का अब जा हुआ है बंद,
 पर मुझ को अब भी लगते हैं, कब्रें सब के वे घर ||

Verse 25 – मां – Mother

एक ज़िद्दी और चंचल बालक चढ़ा जो पीपल पर ,
अम्मा जा तू, न लौटूंगा साँझ ढले तक घर |
ठोकर लगी जो अनजाने में हुआ वह लहूलुहान ,
ज़ोर ज़ोर से रोते बोला ले चल अम्मा घर