Verse 233-यथार्थ- Reality

बीते समय के खेत में दिखता मुझको ये अक्सर,
घर बनाता बालक कोई ढेरी के ऊपर।
मैं बचपन को याद करूँ तो अंतर समझ में आए,
सपने वाला कैसा था और कैसा असली घर ||

Verse 18 – बचपन – Childhood

छड़ी बलूत की हाथ में मास्टर जी आते लेकर,
हमने सबक न याद किया है हम तो है निडर |
घर पहुंचो तो याद न रहते मास्टर और स्कूल,
नयी ही दुनिया हो जाती है अपना कच्चा घर ||

Verse 18 – बचपन – Childhood

छड़ी बलूत की हाथ में मास्टर जी आते लेकर,
हमने सबक न याद किया है हम तो है निडर |
घर पहुंचो तो याद न रहते मास्टर और स्कूल,
नयी ही दुनिया हो जाती है अपना कच्चा घर ||