Verse 159-घर-Home

महल भी घर है, कुटिया घर है,  मग और  जंगल घर ,
कारागार को, मंदिर को भी  मान जो  लेता घर |
घर श्रद्धा है , मात्र नहीं यह दीवारों का वृत्त ,
जिस वास्तु में दिल रखोगे, दिल में करे वो घर ||