Verse 136-मोहब्बत-Love

तू होती जो फूल मैं होता एक हरा पत्तर  ,
एक-दूसरे की संगत में लेते काट उमर |
अगर काँपते सर्दी में भी रहते हम जुड़ कर,
गर्मी में भी साथ साथ रह सजा ही लेते घर ||

Verse 115- मिलन -Communion

मैं बांधूंगा सेहरा जिसमें आशाओं की झालर,
बाराती बारात में मेरी वायदों के लश्कर |
प्रीत के मैं पंडित बुलवाऊँ, मंत्र प्रेम के सुनने,
रक्त का मैं सुन्दर सजा दूँ तेरे माँग-घर ||