Verse 226-कुंजों- Bower

‘कुंजों’ की निंदा होती है-देश है यह डुग्गर,
छोटे पंखिन से सीमित है इनका सदा सफर |
अन्य कोई भाषा न करती कुंजों का तिरिस्कार ,
इसी लिए की इन कुंजों के बहुत दूर है घर ||

Verse 47 – योद्धा – Soldier

गंवई-देहाती जंग को जाते योद्धे यह निडर ,
देशभक्त, पर देश कौन-सा, कुछ ना होश-खबर |
जंग लगी है किस कारणवश इतना भी ना जाने,
पर यह जाने उन्हें बचाने लड़ कर अपने घर ||