Verse 99-इच्छा- wish

इच्छा, इच्छुक ऐसे जैसे जंगें और शस्त्र,
इच्छुक की इच्छा होती है बहुत ज़रूरी, पर |
गर इच्छुक न करे ख़्वाहिश युद्ध कभी न होता,
टंगे दीवारों पर रहते हैं अस्त्र-शस्र तब घर ||

Verse 40 – खोजी – Inquistive

प्यासा मन तो बन जाता है फौलादी औज़ार ,
खोजी खोजें खोज खोज कर जान खुरदुरी कर |
इसी तरह फिर सच्चे खोजी ढूंढे जीवन-सार ,
प्यास बुझाते और बनवाते वह फौलादी घर ||

Verse 45 – मकड़ जाल – Toils

इच्छाओं का त्याग करूँगा, प्रण किया अक्सर,
इसी तरह यह प्रन भी मेरा है तो इच्छा, पर |
अर्थ यह गहरे शब्दों के, मकड़जाल हैं बनते,
घर को जब त्यागो तब बनती यही लालसा घर ||