Verse 100-२४ घंटे-24 hours

सबको एक सामान धरा पर देता परमेसर,
राजा रंक जिनवर पंछी, निर्बल ज़ोरावर |
चरसी और नशेड़ी को भी देता दिन प्रतिदिन,
चौबीस घंटे भेदभाव न उसके लंगर-घर ||