Verse 147- पदार्थवादी-Materialistic

ठीकरियाँ गिन इक इक करके तुझे मिले ठीकर ,
मान ले इनको खेल-खिलौने , पत्थर या ठाकुर  |
श्रद्धा जिसको माने आखिर बनता वही खुदा ,
इन्हीं ख्याली परछाईयों से मानुष भरता घर |