Verse 81- बच्चे – Children

बच्चों के हम जनक हैं, वे ना हमारे मगर,
समतल उनकी सोच के गर तुम रहने दो क्षेत्र |
कोई बनेगा इनमें गौतम होगा कोई मसीह,
सोच हमारी भिन्न है चाहे साँझा अपना घर ||