Verse 160-दीपक-Deepak

लौ से प्यार को साबित करते परवाने जल कर ,
अंधाधुंद स्वतः आ मरते दीपशिखा ऊपर |
जल परवाना  मिट्टी बनता मिट्टी से फिर दीप ,
इसी विधि से दीपक जलते रहते हैं घर-घर ||