Verse 44 – स्वर्ग – Heaven

मानव के कर्मो का लेख होता है आखिर,
स्वर्ग के मुंशी तब कहते है प्राणी देर न कर|
जितनी देर करो वो उतनी ‘सुरगी घटाते ,
सो बेहतर है रोज़ बैठकर लेखा करले घर ||