Verse 238-हिंदुस्तानी- Indian

मुझे न भाएँ पौंड और रूबल खीचें न डॉलर ,
नहीं दासता करूँ किसी की मानूं न आर्डर।
मैं डुग्गर का वासी सह सकता हूँ भूख व प्यास,
देश बेच कर कभी बनाऊंगा न अपना घर ||

Verse 236-डुग्गर- Duggar

जम्मू में है ग’रने-वसाका थूहर और कीकर,
साँप, ‘गनाह’ बिच्छू ज़हरीले और विषैल विषधर।
लेकिन यहाँ की बोली मीठी जाने सब यह बात ,
जिस के कारण गूँज रहा है डुग्गर का घर-घर ||