Verse 238-हिंदुस्तानी- Indian

मुझे न भाएँ पौंड और रूबल खीचें न डॉलर ,
नहीं दासता करूँ किसी की मानूं न आर्डर।
मैं डुग्गर का वासी सह सकता हूँ भूख व प्यास,
देश बेच कर कभी बनाऊंगा न अपना घर ||