Verse 205-इच्छुक और इच्छा-Desire

इच्छा, इच्छुक ऐसे जैसे युध और शस्त्र ,
इच्छुक हिट इच्छा होती है बहुत ज़रूरी पर |
जब इच्छुक की गाडी में इच्छा का ईंधन न हो,
गतिहीन चलने का केवल इच्छुक रहता घर ||

Verse 55- मन – Mind

यह मन पाखी उड़ता जाए , भले थके हो पर,
उड़ते-उड़ते तन का चाहे बन जाये पिंजर |
न ही उसका ठौर ठिकाना , न इसकी मंज़िल,
लम्बी दिव्य उड़ाने पे निकला , पर न कोई घर ||