Verse 172-भक्ति -Devotion

आलोकित-सा कौन है बैठा सीने के अंदर,
छाती की इस गुफा के भीतर छलके भक्ति-सर।
मेरे गीत हैं जिसके कारण धारा एक अजस्र,
मुझे लगे है दिल मेरा है दुर्गा का ही घर ||