Verse 225- आतुर- Restless

कब से आतुर बैठा हूँ मै तुझसे नेह लगाकर,
और विलग न रह पाउँगा दशा हुई कातर |
मुझे बता प्रियतमा ऐसे प्रेम निभेगा कब तक ,
छोड़ विछोह , आ चलो बनाएँ रास्ता-बस्ता घर ||