Verse 61-पिंजरा – Cage

आस सुरो की मारक-धाकड़ घेरे है मिल कर ,
पकड़ दुनाली चले शिकारी जब बोले तीतर |
मौत के डर से कैसे कोई अपनी उमंगें छोड़े ,
ताल-सुरो का गाला जो घोंटे , पिंजरा बनता घर ||