Verse 17 – उम्र – Age

किसी ने पूछा कितना अनुभव कितनी तेरी उम्र ,
अभी किया न लेखा-जोखा हुई बहुत गड़बड़ |
मानव उमरे ही गिनता है उस पल जब के फिर ,
कुछ न गिनने को बचता है बैठ अकेले घर ||