Verse 208-पूर्वज -Ancestors

कहे कहावत मात-पिता की करनी भुगतेय पुत्तर ,
लेकिन ऐसी चिंताओं से उठ जा तू ऊपर |
बुरा किया जो पुरखों ने, तू भोग ले उसका अपयश,
पर अच्छाई उनकी लेकर सजा ले पाना घर ||

Verse 33 – हठ – Persistence

कठिन दिशा गर पकड़ी है तू रास्ता पूरा कर,
वार्ना दुनिया कर देती है अपमानित दर-दर|
मुश्किल को जो आसां करके घर को तुम लौटोगे,
अभिनन्दन को मचल देगा हश-हश करता घर||

Verse 36 – सतत – Perseverance

शौक अनोखा पाला है गर मन मंदिर के अंदर,
साध बना लो उसको अपनी सब साधों से ऊपर |
भूख और लोभ को दिल से त्यागो, उसकी राह ना छोड़ो,
मिट जाये हस्ती तेरी या उजड़े तेरा घर ||