Verse 190-रूह -Soul

जब भी काँपे रूह तुम्हारी जपता जा हर-हर ,
अल्लाह-अल्लाह राम-राम कोई भेदभाव न कर |
सच्चे मन से जो सोचोगे पूरी होगी बात,
जिसमें चित्त लगाओ, वही रूह का घर ||

Verse 164- मंत्र- Chants

किस को मिला है ठौर-ठिकाना मंत्र जपने पर,
दिव्य ष्टि देती है भक्ति खुलें हैं इसके दर |
जिससे जिसे प्रेम हो जाए,  धरे वह उसका ध्यान,
जंतर-मंतर सब  धोखा है घर में मिलता घर ||

Verse 147- पदार्थवादी-Materialistic

ठीकरियाँ गिन इक इक करके तुझे मिले ठीकर ,
मान ले इनको खेल-खिलौने , पत्थर या ठाकुर  |
श्रद्धा जिसको माने आखिर बनता वही खुदा ,
इन्हीं ख्याली परछाईयों से मानुष भरता घर |