Verse 209-पैसा -Money

अपने आप को समझ रहा था मैं बहुत बहादुर,
अकड़ गया सब तोड़, हवा का इक झोंका आकर |
तन के नॉट का छुट्टा लेने निकला मैं बाजार ,
नॉट वह मेरा जाली निकला उजड़ा मेरा घर ||

Verse 164- मंत्र- Chants

किस को मिला है ठौर-ठिकाना मंत्र जपने पर,
दिव्य ष्टि देती है भक्ति खुलें हैं इसके दर |
जिससे जिसे प्रेम हो जाए,  धरे वह उसका ध्यान,
जंतर-मंतर सब  धोखा है घर में मिलता घर ||

Verse 39 – रंगमंच – Rangmanch

रंगमंच जो घर मेँ हो तो फिर उसके अंदर,
भेदभाव की दीमक लगती है और व्यापे डर |
ऊपर-ऊपर प्रेम दिखावा भीतर विश्वास ,
इसी तरह जर्जर हो जाते है खड़े खड़े ही घर ||