Verse 212-शालू- Shalu

शालू बीटा गोपी बनती तू लेकर गागर,
‘गिद्दा’ गाती, एक्टिंग करती, और बनती एक्टर।
मेहनत से पढ़- लिख कर तू भी सीख ले थोड़ी हिंदी ,
मानोगी जो ये सीख मेरी फिल्म बनाएंगे घर ||

Verse 211-रश्मि – Rashmi

रश्मि बेटे तू खाती है चीनी और शक्कर,
सुन तू मेरी, तुझे बताऊँ जीवन का इक गुर |
तेरी मीठी-नर्म तबीयत और तेरा यह हठ,
इन्हीं में अनुरूप रचोगी मन-मर्ज़ी का घर ||

Verse 210-पूनम- Poonam

पूनम बेटी बात सुनो तुम तनिक कान धार कर,
जान लो , कोई जान सका न किस्मत का चक्कर|
जो होना है, हो जायेगा, जाने कौन क्या होगा,
तेरे भाग में क्या बताऊँ लिखा है किसका घर ||

Verse 208-पूर्वज -Ancestors

कहे कहावत मात-पिता की करनी भुगतेय पुत्तर ,
लेकिन ऐसी चिंताओं से उठ जा तू ऊपर |
बुरा किया जो पुरखों ने, तू भोग ले उसका अपयश,
पर अच्छाई उनकी लेकर सजा ले पाना घर ||

Verse 39 – रंगमंच – Rangmanch

रंगमंच जो घर मेँ हो तो फिर उसके अंदर,
भेदभाव की दीमक लगती है और व्यापे डर |
ऊपर-ऊपर प्रेम दिखावा भीतर विश्वास ,
इसी तरह जर्जर हो जाते है खड़े खड़े ही घर ||

Verse 38 – पहर – Time

समय बहुत ही ज़ोरावर है , किन्तु मौके पर,
रेखा कोई अनजानी सी , खींचो सीने पर |
यही समय तो रास रचाता, देता है सुर ताल ,
प्रेम प्रीत से गीत बने फिर , लाड-प्यार से घर ||

Verse 23- मंदिर – Devalya

एक दिन मई दुखियारा पहुंचा शिवजी के मंदिर ,
मगन खड़ा था शिव-अर्चन में साधु एक्कड़ |
मई बोलै विपता का मारा सीख दीजिये कुछ ,
बोलै वह, क्यों आये यहाँ पर तेरा मंदिर घर ||

Verse 22 – Sangharsh – Hustle

दिन चढ़ते ही पंख पखेरू , मेहनतकश चाकर,
जीने का संघर्ष है करते फिर कितने यह दिन-भर |
सांझढ़ले जब हो जाते है थक कर चकनाचूर ,
थकन मिटाने दिन भर की वो वापस आते घर||

Verse 12 – प्रीत – Love

कुड़ी वह गांव बगूने की रूपवती चंचल,
उसके रूप अनूप पे जाके अटकी मेरी नज़र |
देख के उसको दिल खिल उठता रखूं उसको पास ,
जब तक जीवन तब तक होगी प्रीत हमारा घर

Verse 87- मोहब्बत-Love

घर न होता छत-दीवारें न बेटी-पुत्तर,
घर न होता चारदीवारी, न रिश्ते-मित्तर |
घर होता है प्रीत-तराना, प्यार भरा सुर-ताल,
वारना सिर्फ मकान कहाता, नहीं कहाता घर ||

Verse 26 – शराब – Alcohol

मज़दूर के पैसे लेके जाता ठेके पर,
घर आकर फिर गर्जन करता यह कंजरी का घर |
प्रेत नशा, न दिखते उसको बच्चे भूखे-प्यासे,
घर घोंसला होता है जो समझे उसको घर ||

Verse 28 – जोड़ – Connection

जो बेघर हैं उनके हित में इस दुनिया अंदर ,
अपना नहीं ठिकाना कोई ना ही अपना दर |
करें चाकरी घर-घर जा कर जमा करें दौलत ,
आशा है तो केवल इतनी हो अपना भी घर ||

Verse 29 – परिवार – Family

घर का लोभ तो होता है हर लालच से ऊपर,
घर की खातिर दुनिया लेती दुनिया से टक्कर |
खून-कत्ल होते भाइयों में इसके ही ख़ातिर ,
हर कोई इसकी रक्षा करता , ऐसी चीज़ है घर ||

Verse 46 – घर – Home

तीर्थ स्थान मिले बेगाने, हर एक तीर्थ पर,
गर्व करें अपनी भक्ति पर बड़े-बड़े मंदिर |
भक्त हैं एक-दूजे को देते पते-आशीषें-भेंटें,
पर सब जाते सुख पाने को अपने-अपने घर ||

Verse 15 – शिकारी – Hunter

अरे शिकारी मार न पंछी इतना जुल्म न कर,
फल भीषण है इस गुनाह का लागे तूने न डर |
यह निर्बल,बलवान बलि वह देखे सारे पाप,
हँसता- बसता क्यों उजाड़े तू किसी का घर ||

Verse 12 – प्रीत – Love

कुड़ी एक गावँ बगूने की रूपवती चंचल,
उसके रूप-अनूप पे जाकर अटकी मेरी नज़र |
देख के उसके दिल खिल उठता रखूँ उसको पास,
जब तक जीवन तब तक होगी प्रीत हमारा घर ||