Verse 230-खेल – Game

सभी पैंतरे ठीक पड़े जब होता है बेहतर,
हद पहचाने इन्सां, खेले सीमा के भीतर।
इस से पहले किस्मत उसकी बदले अपनी चाल ,
यारों की टोली से बोले – मैं चलता हूँ घर ||

Verse 195-वेदना -Anguish

कहे वेदना कलाकार से सुन मेरे मित्र ,
निपट अकेली रेखाओं से बना रहा चित्र।
तेरे चित्रों में जीवन की रंगत तब झलकेगी ,
जब मेरे हित खाली रखोगे तुम मन का घर ||

Verse 162- Bistar- Bed

नर्म मुलायम मख़मल जैसे मिले मुझे बिस्तर,
क्यों विकल मन चैन ना पाए, नींद न आए पर |
भला रूह की आँख से ओझल रहते कौन-से रंज,
कैसे भाग्य प्रतीक्षा करते बैठे मेरे घर ||

Verse 137 – भाग्य – Destiny

होनी तो होकर रहती है काहे करे फिकर,
तभी कहूँ मैं प्यार तू करले, करले प्यार तू कर |
मिलन ख़ुशी लेकर आएगा, देगा दुःख वियोग,
घर न अपना कहलाएगा, खाली सूना घर ||