Verse 194-कंटीला-Thorny

वह क्या प्रीत-डगर का राही जिसके मन में डर,
उससे प्रीत निभेगी कैसे सख्त न जिगर।
दिल-ओ-जान की राह के कांटे चुनने पड़ते खुद,
चुभन से डरते रहने पर कंटीला बनता घर ||

Verse 190-रूह -Soul

जब भी काँपे रूह तुम्हारी जपता जा हर-हर ,
अल्लाह-अल्लाह राम-राम कोई भेदभाव न कर |
सच्चे मन से जो सोचोगे पूरी होगी बात,
जिसमें चित्त लगाओ, वही रूह का घर ||

Verse 37 – लीला – Sight

अगर देखनी चाहो लीला प्रेम की , बनो निडर,
डरते-डरते कदम न रखना प्रेम के इस मंदिर |
लाज प्रेम की रखनी है तू इसे लहू से सींच ,
प्यार खून से रंगे न जब तक बनता नहीं है डर ||