Verse – 123 – डर – Fear

नहीं बहा तू आँसू अविरल काँप नहीं थर-थर,
तू ना जाने डर है किस का – अजब है तेरा डर |
जग का अपना रोना, तेरा अपना है रोदन,
तू अपने घर बैठ के रोता दुनिया अपने घर ||