Verse 122 – फूल – Flower

जीवन क्या है ? घास का तिनका, मैं सोचूँ अक्सर,
अथवा फूल क्यारी का है रंग बहुत सुन्दर |
एक हवा के झोंके से ही बिखरे फूल और पात,
जिस घर उगते फूल वो बनता अजब अनोखा घर ||

Verse 34 – गुलदस्ते – Bouquets

घर की शोभा बने गृहस्ती और उसके अंदर
आशाओं के बीजों से ही फूटे प्रेमांकुर |
यह है क्यारी तू माली है सींच गुढ़ाई कर,
मधुर सुवासित गुलदस्तों से सजेगा तेरा घर ||