Verse 186-ईंट-Bricks

नक़्शे सोचो, रूप विचारो सुन्दर घर के, पर,
अपना नाम लिखा लो चाहे ईंट-ईंट ऊपर |
खूब सजाओ खूब संवारो इसका कोना-कोना,
लोग देख कर बरबस बोलें, कितना सुन्दर घर ||

Verse 159-घर-Home

महल भी घर है, कुटिया घर है,  मग और  जंगल घर ,
कारागार को, मंदिर को भी  मान जो  लेता घर |
घर श्रद्धा है , मात्र नहीं यह दीवारों का वृत्त ,
जिस वास्तु में दिल रखोगे, दिल में करे वो घर ||