Verse 202-सर्वज्ञ-Omniscient

दानी चतुर पांखडी करते दान बहुत मगर,
वक़्त पड़े तो मूत्र न पाते ज़ख्मो के ऊपर |
सोचें यदि यह दान से उनके पाप मिटेंगे सारे ,
परमेश्वर से कब भूला है साथी किसी का घर ||