Verse 34 – गुलदस्ते – Bouquets

घर की शोभा बने गृहस्ती और उसके अंदर
आशाओं के बीजों से ही फूटे प्रेमांकुर |
यह है क्यारी तू माली है सींच गुढ़ाई कर,
मधुर सुवासित गुलदस्तों से सजेगा तेरा घर ||