Verse 178-मंदिर -Temple

घर होता है धर्म का मंदिर, मंदिर प्रेम का घर,
मंदिर धर्म का घर होता है-घर प्रेमिल मंदिर।
प्रेम और घर समधी होते हैं मंदिर प्रेम भी समधी,
प्रेम-प्यार से धर्म निभा कर मंदिर बनता घर ||

Verse 157-समस्त-Everything

घाव पे रखे कोमल फाहे ज़ख्म भी देता घर,
मर्मान्तक अपशय भी देता, यश भी देता घर |
घर का रंग उतर न पाए दूर रहो या पास ,
दूर भी देता सुर-लय मन को, पास  भी देता घर ||

Verse 29 – परिवार – Family

घर का लोभ तो होता है हर लालच से ऊपर,
घर की खातिर दुनिया लेती दुनिया से टक्कर |
खून-कत्ल होते भाइयों में इसके ही ख़ातिर ,
हर कोई इसकी रक्षा करता , ऐसी चीज़ है घर ||