Verse 185-औरत-Women

औरत ज़ात तो कैद पड़ी है हर घर के अंदर,
यह हालत अब नहीं रहेगी बहुत देर तक पर।
जिस घर में वह कैदी बनती होती वह प्रलय,
जिस घर रहती देवी बन कर बस बसता वह घर ||

Verse 172-भक्ति -Devotion

आलोकित-सा कौन है बैठा सीने के अंदर,
छाती की इस गुफा के भीतर छलके भक्ति-सर।
मेरे गीत हैं जिसके कारण धारा एक अजस्र,
मुझे लगे है दिल मेरा है दुर्गा का ही घर ||