Verse 149- संतोष- Contentment

जो भी देता दाता उसका करता अदा शूकर ,
काम होता या ज़्यादा होता मुझको नहीं ख़बर |
स्वर्गानन्द उठाते कुटिया में भी रह खुश-दिल ,
दुखी जानो को महलों में भी लगते छोटे घर ||

Verse 127 – स्नेह – Affection

सारी खुशियाँ,सोच, वासना प्रीत के हैं चाकर,
इसके मेह्तर-वैद, संतरी सब इसके नौकर |
कोई अगर लालसा जिगर जलाये वह भी इसकी दास,
प्रीत है मलिका, चले हुकूमत इसकी है घर-घर ||